सफल बिजनेसमैन बनने के लिए सफल मंत्रा
नमस्कार दोस्तों आज के इस ब्लॉग में हम सभी जानेंगे की एक सफल बिजनेसमैन बनने के लिए किन-कन बातों को ध्यान में रखना जरूरी होती है। तो आइए आज के इस सफल बिजनेसमैन बनने की सफल मंत्रा को शुरुआत करते हैं।
मेरे प्रिय दोस्तों सबसे पहले हम एक सफल बिजनेसमैन बनने के लिए क्या नहीं करना चाहिए, इसके बारे में जानते हैं। फिर उसके बाद हम यह जानेंगे कि एक सफल बिजनेसमैन बनने के लिए क्या-क्या करना पड़ता है ?
“परिश्रम ही पूँजी है, आलस्य ही गरीबी है”
गरीबी दैवी प्रकोप नहीं, बल्कि आलस्य, प्रमाद, अपव्यय एवं अन्य दुर्गुणों के एकत्रीकरण का ही प्रतिफल है। उद्यम की विशेषता उद्यमिता है। जो निरंतर कार्य में रत हैं। जैसे मनुष्य का गुण उसकी मनुष्यता है, उसी प्रकार बिजनेसमैन का गुण उसकी उद्यमिता है। उद्यमिता को विकसित करने के लिए बिजनेसमैन होना आवश्यक है। मैंने लखनऊ में एक भिखारी से कहा कि तुम्हारा शरीर ठीक है, तुम भीख क्यों माँगते हो, मेहनत क्यों नहीं करते ? तो उसने जवाब दिया, बाबूजी, मैंने आपसे पैसा माँगा है, राय नहीं। अब आप ही बताएँ कि ऐसे व्यक्ति की गरीबी कौन दूर कर सकता है ?
दोस्तों सबसे पहले हम यह जानते ही कि बिजनेसमैन कितने प्रकार कर के होते है।
बिजनेसमैन तीन प्रकार के होते हैं।
1. पहले वे, जो योजना तो बनाते हैं, लेकिन उसे परेशानी समझकर बीच ही में रद्द कर देते हैं।
2. दूसरे वे, जो योजना बनाते हैं, परंतु योजना में परेशानी आने पर उसे बीच में ही छोड़ देते हैं।
3. तीसरे वे, जो योजना बनाते हैं, परेशानी आती है, लेकिन परेशानी का सामना करते हैं, यानी योजना को कार्यान्वित करते हैं। और एक सफल बिजनेसमैन बन भी जाते है।
उद्यमिता के सूत्र
“लक्ष्य स्थिर हो एवं संकल्प में दृढता हो तो सफलता मिलना निश्चित है”
● काम को कर्मयोगी की तरह, यानी पूरे मन से करो। ‘योगः कर्मसु कौशलम्’ कुशलतापूर्वक किया हुआ कर्म ही योग है।
● आदमी काम की अधिकता से नहीं थकता, काम की अनियमितता से थकता है। आधे-अधूरे मन से किया गया काम थकान देगा तथा इससे काम की सफलता भी संदिग्ध हो जाएगी।
● बिजनेसमैन काम की अधिकता से नहीं थकता, काम जब नहीं रहता तो थकता है।
● एक बिजनेसमैन किसी उद्यम को सफलतापूर्वक चलाता है और दूसरा नुकसान उठाता है, यानी उद्योग नहीं चलता, बिजनेसमैन ही उसे चलाता है।
● हमें यह उक्ति अच्छी लगती है—‘‘परिश्रमी समस्या का जवाब होता है, आलसी समस्या का हिस्सा होता है।’’
● ज्ञान के आलोक में कर्म करेंगे तो उद्यमिता बढ़ेगी। बिना ज्ञान के कर्म करेंगे तो श्रम का अपव्यय होगा। ज्ञान दिशा देता है, यही कारण है कि कुरुक्षेत्र के मैदान में धनुर्धर अर्जुन ने अपने रथ की लगाम कृष्ण के हाथ में दे दी थी।
● बिजनेसमैन अपने श्रम का पूरा सदुपयोग करता है, समय नष्ट नहीं करता।
● काम को काम समझकर मत करो, कर्तव्य-कर्म समझकर करो।
● उद्यम करने में कठिनाइयाँ आएँ, तो जाओ सफल एवं बुद्धिमान बिजनेसमैन के पास। समस्या का समाधान मिलेगा।
● उद्योग में कड़ी मेहनत, ईमानदारी एवं टीम भावना होना आवश्यक है। आपकी सफलता को कोई रोक नहीं सकता।
● ऊर्जा चाहे प्रकट हो या अप्रकट, बिजनेसमैन उसका पूरा-का-पूरा उपयोग करता है।
● प्रत्येक पुरुष के अंदर एक महापुरुष बैठा है। आप अच्छे बिजनेसमैन तभी बन सकते हैं, जब आप प्रत्येक सहकर्मी के महापुरुष को जाग्रत् कर दें। आपका कर्मचारी ही कर्मयोगी हो जाएगा।
● बिजनेसमैन कभी अनिश्चय या दुविधा में नहीं रहता। गीता का वचन है ‘संशयात्मा विनश्यति।’
● बिजनेसमैन हमेशा सचेत एवं सचेष्ट रहता है।
● बिजनेसमैन आज के काम को कल पर नहीं छोड़ता। सफल आदमी की यही पहचान है।
● हमने डाकुओं को तो महापुरुष बनते देखा है, लेकिन आलसियों को नहीं।
● जो, जितना व्यस्त रहता है, उसके पास सबसे अधिक फुर्सत रहती है, लेकिन निठल्लों के पास समय कहाँ?
● बिजनेसमैन परेशानियों से घबराता नहीं, उनका सामना करता है। क्या हजार काँटे भी गुलाब की सुंदरता और सुगंध को कम कर पाते हैं?
● उद्यम माने श्रम। भारतीय मनीषियों ने तो जीवन के प्रत्येक सोपान में श्रम की महत्ता स्थापित की है। ब्रह्मचर्याश्रम, गृहस्थाश्रम, वानप्रस्थ आश्रम एवं संन्यासाश्रम आदि विभेद इसके प्रमाण हैं। हमारे विश्राम में भी श्रम लगा है, यानी उतना ही आराम करें कि पुनः श्रम करने लायक हो जाएँ।
● तुलसीदासजी ने भी कहा है, ‘‘कर्म प्रधान विश्व रचि राखा।’’ अर्थात् जगत् में उद्यम या कर्म की ही प्रधानता है। ● ‘उद्योगिनां पुरुषसिंहमुपैति लक्ष्मी’ यानी बिजनेसमैन को ही लक्ष्मी प्राप्त होती है। समुद्र मंथन से लक्ष्मी की प्राप्ति उद्यम नहीं, लक्ष्मी की प्राप्ति के लिए समुद्र मंथन उद्यम है। ● हमारा भाग्य भी क्या है? जो कर्म हमने आज किया और फल बाद में मिला तो भाग्य के रूप में मिला। आज का भाग्य भी पूर्व में किए हुए कर्म का ही फल है, अतः कर्म ही प्रधान है।
● श्रम से अधिक कर्म-संन्यास को महत्त्व देना पतन का कारक है।
● हम जानते हैं, करते नहीं, यानी जानने का महत्त्व नहीं, करने का महत्त्व है। बिजनेसमैन वही है, जो जाने भी और करे भी। जो जानकर करने में विश्वास करे, वही बिजनेसमैन है।
● अच्छा बिजनेसमैन अपने साथ काम करनेवालों को नीचा दिखाने या अपना बड़प्पन दिखाने का प्रयास नहीं करता, बल्कि अपनी उपलब्धियों का श्रेय भी साथवालों को देता है, जिससे उनका मनोबल ऊँचा रहे। ध्यान रखें कि काम करनेवाला व्यक्ति केवल पैसे के लिए काम नहीं करता, वह भी मान-सम्मान चाहता है।
● सफल बिजनेसमैन अपने साथ काम करनेवालों की सुविधा का भी खयाल रखता है। स्वयं गाड़ी पर चढ़े तो उन्हें साइकिल तो मिलनी ही चाहिए।
● सफल बिजनेसमैन क्रोध का उपयोग कम-से-कम करता है। श्रेष्ठ क्रोध वह है, जो देर से आए और जल्दी चला जाए। क्रोध में हम अपना विवेक खो बैठते हैं।
● एक बार मैं एक फैक्टरी में गया। वहाँ के एक कर्मचारी से पूछा कि क्या कर रहे हो, तो उसने कहा कि समय काट रहा हूँ। दूसरे से पूछा तो उसने कहा कि पाँच बजने की प्रतीक्षा कर रहा हूँ और तीसरे को देखा, जो अपने काम में व्यस्त था। उसे समय का खयाल ही नहीं था। पहले कर्मचारी की छुट्टी हो जाएगी, दूसरे की बढ़ोतरी नहीं होगी और तीसरा तरक्की करता चला जाएगा।
● बिजनेसमैन को जो मिलता है, उससे वह संतुष्ट रहता है। अधिक पाने का प्रयत्न जरूर करता है, लेकिन इस बात का खयाल रखता है कि हमारा असंतोष हमें निष्क्रिय न बना दे।
● हमारा शरीर ऊर्जा का असीम भंडार है, इस शक्ति का उपयोग करें। इसे बरबाद मत होने दें।
● बिजनेसमैन अपने समय का सदुपयोग करता है। केवल समय ही है, जो वापस नहीं आता।
● बिजनेसमैन को मानकर चलना चाहिए कि हमारे हाथ-पैर की दस-दस उँगलियाँ दशावतार हैं। ये जितनी व्यस्त रहेंगी, जीवन उतना ही समृद्ध रहेगा।
● बिजनेसमैन जब स्वयं अनुशासन में रहेगा, तभी वह दूसरों पर शासन कर पाएगा।
● सफल बिजनेसमैन वही, जिसने ज्ञान (जानकारी) का कर्म में रूपांतरण कर लिया और अपने समय का सदुपयोग करना सीख लिया।
● परिश्रमी के पास हमेशा एक कार्यक्रम होता है। आलसी के पास हमेशा एक बहाना होता है।
● परिश्रमी कहता है, लाइए, मैं आपका काम कर दूँ, आलसी कहता है, यह मेरा काम नहीं है।
● परिश्रमी हर समस्या में समाधान देखता है, आलसी हर काम में समस्या देखता है।
● परिश्रमी कहता है, ‘‘यह कठिन हो सकता है, लेकिन संभव है।’’ आलसी कहता है, ‘‘यह संभव हो सकता है, परंतु यह बहुत कठिन है।’’
● ध्यान रखें, उपलब्धि क्रियाप्रधान है, कृपाप्रधान नहीं। बुद्ध ने अपने प्रधान शिष्य आनंद से कहा था कि तुझे जो कुछ भी मिलेगा तेरे प्रयास एवं प्रयत्नों से मिलेगा। मैं तो केवल रास्ता दिखा दूँगा, मगर चलना तो तुझे ही पड़ेगा।
● किसी भी क्षेत्र का महान् व्यक्ति ही महान् बिजनेसमैन हुआ है।
● जिस तरह एक जवान औरत एक बूढ़े का आलिंगन करना नहीं चाहती, उसी तरह लक्ष्मी आलसी, भाग्यवादी और साहसविहीन व्यक्ति को नहीं चाहती।
● बिजनेसमैन मनुष्य अपनी हानि पर कभी नहीं रोते, वे उस क्षति की भरपाई करने का उपाय करते हैं।
● बिजनेसमैन होने के लिए स्वयं ही प्रयास करना पड़ेगा। किसी और के प्रयास से हम बिजनेसमैन नहीं हो सकते।
● संघर्षपूर्ण जीवन ही उद्यमिता का लक्षण है।
● बिजनेसमैन अपने लक्ष्य को परिश्रम, हिम्मत एवं इच्छा से प्राप्त करने का प्रयास करता है।
● उद्यम न करनेवाले से वह अधिक श्रेष्ठ है, जो उद्यम करके असफल हो जाता है। कारण, उसमें परिश्रम करके सफल होने की संभावना निहित है।
● बिजनेसमैन इस बात को भली-भाँति जानता है कि उस ज्ञान से क्या लाभ, जो कर्म को प्रभावित नहीं करता।
● बिजनेसमैन की सफलता की कसौटी उसका बिजनेसमैन होना है, न कि केवल अध्ययन, व्याख्यान या प्रचार करना।
● असफलता मनुष्य की पराजय नहीं है। पराजय है, असफलता से डरना और पुनः प्रयास न करना।
सर्वश्रेष्ठ प्रबंधन के भी अनेक व्यावहारिक सूत्र हैं। उन सूत्रों की व्याख्या इस प्रकार है।
★ दूसरों पर शासन करने से पहले स्वयं अनुशासन में रहना पड़ेगा। आप चाहते हैं कि कर्मचारी पान-बीड़ी का सेवन काम के समय न करें तो सबसे पहले प्रबंधक को स्वयं इसके सेवन से अपने को दूर रखना होगा।
★ अपने अधीनस्थों को कभी नीचा दिखाने का प्रयास न करें। उनकी प्रशंसा करें और उनकी कार्यक्षमता का बोध करवाकर उनके पौरुष को जाग्रत् करने का प्रयत्न करें। अपना बड़प्पन दिखाने के प्रयास से विरत रहें, क्योंकि दूसरे का बड़प्पन कोई जल्दी सुनना नहीं चाहता।
★ अपनी उपलब्धि का श्रेय भी अधीनस्थों को दें। इससे अधीनस्थ भी स्वयं को गौरवान्वित अनुभव करते हैं और अपनी क्षमता का बेहतर उपयोग करते हैं।
मेरे प्यारे पाठक मुझे पूर्ण विश्वास है कि यह लेख आपको दिल और दिमाग तक छू गई होगी। अतः आपसे विनम्र निवेदन है कि आप इस लेख को अपने प्रिय मित्रों एवं परिवारों के बीच जरूर भेजें। यहां तक लेख पढ़ने के लिए आपका दिल से शुक्रिया। धन्यवाद
@ सौरव ज्ञाना
Motivational Speaker & GS TEACHER




