धोखेबाज मित्र से सावधान कैसे रहें | आचार्य चाणक्य नीति | AACHARYA CHANAKYA | धोखेबाज मित्र न विश्वसेत् कुमित्रे च मित्रे चाऽपि न विश्वसेत्। कदाचित् कुपितं मित्रं सर्व गुह्यं प्रकाशयेत्।। अर्थ : जो मित्र खोटा है, उ… BY : SAURAV GYANAsauravgyana.com •September 21, 2021