अध्याय 17 | TOP 05 AACHARYA CHANAKYA NITI | आचार्य चाणक्य नीति
TOP 05 AACHARYA CHANAKYA NITI पुस्तकप्रत्ययाधीतं नाधीतं गुरुसन्निधौ। सभामध्ये न शोभन्ते जारगर्भा इव स्त्रियः।। अर्थात : जिन …
TOP 05 AACHARYA CHANAKYA NITI पुस्तकप्रत्ययाधीतं नाधीतं गुरुसन्निधौ। सभामध्ये न शोभन्ते जारगर्भा इव स्त्रियः।। अर्थात : जिन …
TOP 05 AACHARYA CHANAKYA NITI यस्य चित्तं द्रवीभूतं कृपया सर्वजन्तुषु। तस्य ज्ञानेन मोक्षेण किं जटाभस्मलेपनैः।। अर्थात : जिस…